सरिता के अगस्त (प्रथम) अंक में" धर्म जनित भीड़ का खतरा" पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। आए दिन ऐसी खबरें अखबार और न्यूज़ चैनल की शोभा बढ़ाती रहती हैं। तरस आता है ऐसे लोगों की बुद्धि ...
70- 80 के दशक में यदि किसी को खूबसूरत कहना होता था तो उसकी तुलना हीरो का हीरोइन से की जाती थी। " तुम तो बिल्कुल हीरो की तरह हैंडसम हो" या फिर, " तुम तो किसी हीरोइन जैसी सुंदर हो" ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उस समय मॉडलिंग या फिल्म के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए खूबसूरत होना मुख्य शर्त हुआ करती थी। मगर आज ऐसा नहीं है। चिकित्सा विज्ञान के चमत्कार के दौर में एक और चमत्कार हुआ, जिसका नाम है कॉस्मेटिक सर्जरी। जी हां ! आज विज्ञान इतना तरक्की कर चुका है कि यदि आपको ईश्वर के द्वारा दिया हुआ अपना रंग रूप पसंद ना आए तो आप इसे कॉस्मेटिक सर्जरी के माध्यम से बदलवा भी सकते हैं। क्योंकि यह सर्जरी बेहद महंगी होती थी, अतः ज्यादातर फिल्म उद्योग से जुड़े स्त्री पुरुष हीं करवाते थे। मगर अब कुछ धनाढ्य वर्ग के लोग भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषकर महिलाएं। कॉस्मेटिक सर्जरी के अंतर्गत कई प्रकार की सर्जरी होती है, जिसके में प्रमुख हैं -- फेस लेफ्ट, आइब्रो लिफ्ट, हेयर रीस्टोरेशन, राइनोप्लास्टी, गायनेकामिस्टर, ब्रेस्ट इंप्लांट्स, लिप फिलर इत्यादि। अब तो सर्जरी ...
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