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Showing posts from October, 2020

सिनेमा और राखी का बंधन

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भारतीय सिने जगत का राखी के त्यौहार के साथ एक अनोखा बंधन है। आज भी हर वह फिल्म जिसमें भाई बहन हो तो राखी का एक दृश्य तो बनता ही है। लेकिन एक समय था, जब पूरी फिल्म भाई बहन की प्रेम, समर्पण और त्याग पर ही आधारित होता था।  फिल्मों में रक्षाबंधन के दृश्य फिल्माने का सबसे पहले चलन हुआ था 1941 में आई फिल्म "सिकंदर" से। इस फिल्म में पृथ्वीराज कपूर ने सिकंदर की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में सिकंदर की पत्नी ने पति के हिंदू शत्रु पुरू यानी कि राजा पोरस को राखी बांधकर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया।  इसके बाद महबूब खान ने अपनी फिल्म हुमायूं (1945)  में इस त्यौहार को विस्तार से दिखाया। हुमायूं बने अशोक कुमार और रानी कर्णावती के रोल में अभिनेत्री बीना ने ऐसा जीवंत अभिनय किया कि फिल्मों में रक्षाबंधन दिखाने का प्रचलन हो गया। इस फिल्म मे  मुगल काल में बादशाह हुमायूं चितौड़ पर आक्रमण करने के लिए आगे बढ़ रहा था। ऐसे में राणा सांगा की विधवा कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा वचन ले लिया। 1959 मे बनी एक फिल्म "छोटी बहन" का गीत "भैया मेरे र...

आजादी के मायने

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आजादी के मायने  सबसे पहले तो मैं अपने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देना चाहुंगी। वर्ष 1947 से 2020 तक का 74 वर्षों का यह सफर हमारे देश की प्रगति का सफ़र रहा है। आर्थिक सामाजिक राजनीतिक एवं व्यवसायिक स्तर पर हमारे देश ने वैश्विक प्रगति की है। आज हमारे देश का हर नागरिक अपने सभी अधिकारों का प्रयोग करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है। आज विश्व पटल पर भारत का नाम एक सशक्त देश के रूप में लिया जा रहा है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय में भी देश की जनता ने धैर्य एवं सद्भावना की मिसाल पेश की है। और पूरा विश्वास है कि हम जल्द हीं इस आपदा से छुटकारा पा लेंगे।  इन सब उपलब्धियों  के बावजूद जब हम आजादी का विश्लेषण करने के लिए बैठते हैं तो ऐसा लगता है मानो अभी कहीं कुछ अधूरा सा है आजादी का मतलब क्या सिर्फ सत्ता परिवर्तन होना ही था ? क्या अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना ही आजादी है ? क्या हमे सिर्फ ब्रिटिश सरकार से ही स्वतंत्रता चाहिए थी ?  यह सब तात्कालिक कारण हो सकते थे ,परंतु आज आजादी के संदर्भ में मुझे ऐसा लगता है कि आज हमें दो सबसे महत्वपूर्ण चीजों से आजादी...

चमकती दुनिया की स्याह सच्चाई

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चमकती दुनिया की सच्चाई  बॉलीवुड के नवोदित कलाकार और दर्शकों के चहेते सुशांत सिंह राजपूत का शव आपत्तिजनक परिस्थिति में मिलने के बाद कई लोगों का बॉलीवुड के प्रति मोहभंग हो गया है। खबरों की मानें तो 14 जून की सुबह सुशांत सिंह राजपूत का शव उनके कमरे में पंखे से झूलता हुआ पाया गया। अटकले यह भी लगाई गई कि नेपोटिज्म के शिकार सुशांत ने अवसाद ग्रस्त होकर आत्महत्या कर ली। परंतु दिन प्रतिदिन इस आत्महत्या से संबंधित कई रहस्य सामने आने लगे और अंततः यह केस सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया।     वैसे तो बॉलीवुड में इस तरह की घटना कोई पहली बार घटित नहीं हुई है। फिल्मी सितारों की दुनिया आम जनता के लिए जितनी चमकीली होती है उस में कार्यरत लोग के लिए वह उतनी ही काली होती है। फिल्मी दुनिया से जुड़ी कई कड़वी सच्चाईयां समय-समय पर उजागर होती रहती हैं जिसमें कुछ समस्याएं प्रमुख हैं: --- 1. कास्टिंग काउच:--- बॉलीवुड की ऐसी ही स्याह सच्चाई है ‘कास्टिंग काउच’ की, जिसके बारे में बॉलीवुड का हर शख्स जानता है, लेकिन उनमें से बहुत कम लोग ऐसे हैंं, जो इस सच्चाई को स्वीकार करते हैं. अपने बोल्ड अंदाज के लिए जान...

सिनेमा सौन्दर्य और सर्जरी

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70- 80 के दशक में यदि किसी को खूबसूरत कहना होता था तो उसकी तुलना हीरो का हीरोइन से की जाती थी। " तुम तो बिल्कुल हीरो की तरह हैंडसम हो"  या फिर, " तुम तो किसी हीरोइन जैसी सुंदर हो"  ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उस समय मॉडलिंग या फिल्म के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए खूबसूरत होना मुख्य शर्त हुआ करती थी। मगर आज ऐसा नहीं है। चिकित्सा विज्ञान के चमत्कार के दौर में एक और चमत्कार हुआ, जिसका नाम है कॉस्मेटिक सर्जरी। जी हां ! आज विज्ञान इतना तरक्की कर चुका है कि यदि आपको ईश्वर के द्वारा दिया हुआ अपना रंग रूप पसंद ना आए तो आप इसे कॉस्मेटिक सर्जरी के माध्यम से बदलवा भी सकते हैं। क्योंकि यह सर्जरी बेहद महंगी होती थी, अतः ज्यादातर फिल्म उद्योग से जुड़े स्त्री पुरुष हीं करवाते थे। मगर अब कुछ धनाढ्य वर्ग के लोग भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषकर महिलाएं।  कॉस्मेटिक सर्जरी के अंतर्गत कई प्रकार की सर्जरी होती है, जिसके में प्रमुख हैं -- फेस लेफ्ट, आइब्रो लिफ्ट, हेयर रीस्टोरेशन, राइनोप्लास्टी, गायनेकामिस्टर, ब्रेस्ट इंप्लांट्स,  लिप फिलर इत्यादि।  अब तो सर्जरी ...