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Showing posts from January, 2018

कैसे कहें नववर्ष है आया

कैसे कहें नववर्ष है आया कलियां चटकी बेलों पर, पल्लव   निकले शाखों पर पंछी निकले तिनकों से,हवा बह रही खुशबू लेकर समय रथ पर बैठे सूर्य भी लो आया...... यह तो है हर सुबह की माया...फिर, कै...

क्यों छली जाती हो तुम

क्यों छली जाती हो तुम क्यों छली जाती हो तुम कभी सीता बनकर राम से तो कभी राधा बनकर श्याम से क्यों तुम्हारे होंठ सिल जाते हैं कभी अग्नि परीक्षा के समय तो कभी चीरहरण के समय तुम ...
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Grihshobha ke december second me prakashit

गृहशोभा का नवंबर (द्वितीय )अंक में विहंगम के अंतर्गत  प्रकाशित टिप्पणी "धर्म हटाओ औरत बचाव" में बिल्कुल सही बात कही है आपने। सदियों से धर्म का शिकार सबसे ज्यादा महिलाएं ही ह...

Sarita ke January first 2018 me prakashit

सरिता के नवंबर (द्वितीय )अंक में प्रकाशित अग्रलेख "चुनावी भंवर :धर्म की चाशनी पर हावी विकास की कुनैन"  सत्ता के गलियारे में बिछी धर्म के कालीन की पोल खोलती है। यह सच है कि इस सा...