ओ टी टी बनाम सिल्वर स्क्रीन

ओटीटी बनाम सिल्वर स्क्रीन


 पिछले 8 महीनों में पूरे विश्व में इतना कुछ खो दिया है कि आकलन करना मुश्किल है। कारण सिर्फ एक, "कोरोनावायरस"

 कोरोनावायरस के कहर से जनता को बचाने के लिए प्रशासन ने 25 मार्च 2020 को पूरे भारत में लाकडाउन का ऐलान कर दिया। पूरा देश अपने ही घर में कैदी बनकर रह गया। फिल्म जगत भी इस वायरस से अछूता ना रहा । 17 मार्च से ही फिल्म और टीवी सीरियल की शूटिंग बंद कर दी गई। फिल्म निर्माताओं के करोड़ों रुपए फिल्मों में फंसे हुए थे। सिनेमा हॉल बंद होने के कारण फिल्मों को रिलीज करना असंभव हो रहा था। प्रौढ़ वर्ग के दर्शकों के लिए दूरदर्शन ने रामायण और महाभारत का पुनः प्रदर्शन करके उनके मनोरंजन का इंतजाम तो कर दिया था मगर युवा वर्ग बेचैन हो उठा और ऐसे में उनका ध्यान ओटीटी प्लेटफॉर्म की तरफ गया। ओटीटी यानि कि जो इंटरनेट का उपयोग करके युजर्स  के लिए वीडियोस एवं टेलीविजन कंटेंट्स प्रदर्शित करता है। इसके लिए अब ग्राहकों को इन ओटीटी प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लेना होता हैं,और फिर उसमें वे जिस कंटेंट को देखना चाहते हैं वह देख सकते हैं।

     यूं तो भारत में ओटीटी का आरंभ 2008 में ही हो गया था। रिलायंस एंटरटेनमेंट ने "बिगफ्लेक्स प्लेटफार्म" लांच किया मगर यह लोकप्रिय नहीं हो सका क्योंकि यह काफी महंगा था। 2010 में भारत में पहला मोबाइल ओटीटी ऐप "नेक्सजीटीवी" लॉन्च किया जिस पर आईपीएल लाइव देखा जा सकता था। इसका भी जनता पर कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ा।

 2016 में वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स ने अपने वैश्विक शोज के प्रदर्शन के कारण युवा जगत में लोकप्रियता पाई। चार महीने बाद ही नेटफ्लिक्स पर एक भारतीय वेब सीरीज "द सीक्रेट गेम्स" रिलीज हुई जिसे युवा वर्ग का विशेष स्नेह मिला और फिर तो सस्ते इंटरनेट प्लान ओरिजिनल सीरीज रिलीज की गई और दर्शकों को बेहद पसंद आने लगी। धीरे-धीरे इसका विस्तार होने लगा। अमेजॉन प्राइम, विऊ, हॉटस्टार ,अल्ट बालाजी, सोनी लाइव, जी5 भारत के लोकप्रिय प्लेटफार्म है। हॉटस्टार  भारतीय बाजार में छाया हुआ वर्तमान में 400 मिलियन से भी अधिक मासिक आधार पर सक्रिय यूजर्स के साथ डिज्नी के स्वामित्व वाला ओटीटी प्लेटफॉर्म है। इन ओटीटी प्लेटफॉर्म एप्प को लोग आसानी से अपने मोबाइल फोन या टेबलेट पर प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं, और इसे अपनी स्मार्टटीवी से कनेक्ट कर अपने पसंद के शोज एवं फ़िल्में देख सकते है। 
लॉकडाउन के समय में ओटीटी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस समय भारत में कुल 40 से भी अधिक ओटीटी प्लेटफॉर्म है। वर्ष 2018- 2019 में इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का मार्केट लगभग 18000 करोड था लेकिन आज यह रिकॉर्ड टूट चुका है। सब्सक्रिप्शन फीस 25% बढ़ने के बावजूद भी लोगों का आकर्षण रुक नहीं रहा है। मिर्जापुर, पाताल लोक, असुर अप्रत्याशित सफलता पाने वाले वेब सीरीज है। अब तो फिल्म निर्माता अपनी फिल्म में भी इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ही भेज दे रहे हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद उनकी फिल्म "दिल बेचारा" को ओटीटी पर अपार सफलता मिली।

इसके अतिरिक्त "गुलाबो सिताबो" तथा "लक्ष्मी बॉम्ब" भी लोकप्रिय रहे। आज यह कहने में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सिनेमाघरों का अस्तित्व खतरे में आ गया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता का एक बहुत बड़ा कारण है यहां असीमित मात्रा में कंटेंट्स का उपलब्ध होना। आपका इंटरनेट खत्म हो जाएगा ,सारी रात ये सीरीज देखकर आपकी आंखे दुख जाएंगे, लेकिन फिर भी यहां पर कंटेंट्स की कमी नहीं होगी। वेब सीरीज भी 7-8 एपिसोड से कम के नहीं होते हैं। ओटीटी का सबसे अच्छा फायदा यह है कि लोगों को इसके लिए इन्तेजार नहीं करना पड़ता, उन्हें जिस समय जो कंटेंट देखना हो वह देख सकते हैं।

ओटीपी की एक और खासियत यह है कि यहां प्रसारित होने वाली लघु फिल्म वेब सीरीज को सेंसर बोर्ड के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती और यही कारण है कि यहां नए नए लेखक, निर्देशक एवं कलाकारों को खूब प्रोत्साहन मिलता रहता है। इसका एक दुष्प्रभाव यह भी है कि यहां 90% वेब सीरीज में अश्लील दृश्य, खून खराबा, गालियां इत्यादि की भरमार होती है। भारत में ullu.app एक ऐसा प्लेटफार्म है जिस ने सारी मर्यादाएँ लांघ रखी है। सबसे महंगा प्लेटफार्म होने के बावजूद भी यहां दर्शकों की कोई कमी नहीं है। यह कहना गलत नहीं होगा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने हम भारतीय से बहुत कुछ छीन लिया है। सेहत और नींद की बात ना भी करें तो यहां सच्चाई के नाम पर हिंसा एवं अश्लीलता परोसी जा रही है जो भारतीय संस्कृति का पतन कर सकती है। एक समय था जब हमारे देश में सिनेमा किसी त्योहार से कम नहीं होता था। खुशियों का सेलिब्रेशन सपरिवार, सपत्नीक या प्रेमिका के हाथों को थाम कर सिल्वर स्क्रीन के सामने बैठकर पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक के साथ मनाया जाता था। लेकिन अब यह मुमकिन नहीं, क्योंकि सौ में से पांच वेब सीरीज भी ऐसे नहीं है जो परिवार के साथ देखी जा सकती हो ।

आरती प्रियदर्शिनी, गोरखपुर

Comments

  1. जी, आपने सही लिखा है कि वेबसीरिज ने अपनी सारी मर्यादाएं तोड़ दी है। कोई भी वेबसीरिज देख लीजिये, बिना अश्लील दृश्य के उसकी कहानी आगे बढ़ती ही नहीं। ये दृश्य भी जबरदस्ती ठूसे गए से लगते हैं। ULLU की तो पूछिये ही नहीं।

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