कैसे कहें नववर्ष है आया

कैसे कहें नववर्ष है आया

कलियां चटकी बेलों पर, पल्लव   निकले शाखों पर
पंछी निकले तिनकों से,हवा बह रही खुशबू लेकर
समय रथ पर बैठे सूर्य भी लो आया......
यह तो है हर सुबह की माया...फिर,
कैसे कहें....नववर्ष है आया

  माना कि कैलेंडर बदल गया
दिन महीने और तारिखें बदली
शायद नया साल है आया
लेकिन,मानव आज भी खुद को तू क्यों बदल न पाया
फिर, कैसे कहें..कि नववर्ष है आया

टुकड़ों में हमारे देश बंटे हैं
सरहद पर लाशों के ढेर पर हैं
विधवाओं के विलापों से  तो
आज भी जलजला ना आया
फिर कैसे कहें नव वर्ष है आया

रेप और लव जिहाद से रंगे अखबारों के पन्ने हैं
मासूमों की देह पर कुदृष्टि डाल रहे हैं वह अपने हैं
आज भी उनकी आंखों में दहशत का है साया
फिर कैसे कहे नव वर्ष है आया

तड़प रही है कोख में और
सिसक रही हर घर में जो....
परंपराओं की बेड़ियों में ख्वाब उनके जकड़े हैं
आज भी उनके कदमों में जंजीरों का है साया
फिर कैसे कहें नव वर्ष है आया

                             आरती प्रियदर्शिनी गोरखपुर

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