कहाँ हैं युवा नेता ?
सितंबर (प्रथम )अंक में प्रकाशित निबंध "युवा नेता कहां है" ने सोचने पर विवश कर दिया। वाकई में युवाओं का देश कहलाने वाला भारत, और दुनिया का सबसे बड़ा कहा जाने वाला लोकतांत्रिक देश का नेतृत्व बड़े-बुजुर्ग नेतागण कर रहे हैं। ऐसे नेता जो जाति ,धर्म, परिवारवाद, परंपरा ,संस्कृति आदि मानसिकता से जकड़े हुए हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे देश के युवाओं में जोश ,आक्रोश, बेचैनी या नेतृत्व क्षमता की कमी है। परंतु सच्चाई यह है कि उनका इस्तेमाल गलत जगहों पर हो रहा है। पिछले कुछ दशकों में राजनीति साम-दाम-दंड-भेद आधारित खेल मात्र बनकर रह गई है। तभी तो अरविंद केजरीवाल जैसे गैर परंपरावादी और धारा के विरुद्ध चलने वाले नेता को विरोधियों ने कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कन्हैया कुमार ,हार्दिक पटेल आदि युवा नेताओं का राजनीति के गलियारे में मटियामेट होते देख कर हीं शायद आज का युवा वर्ग राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहता है।
हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था भी ऐसी है कि जहां केवल यांत्रिक कलपुर्जे मात्र बनाए जाते हैं, ताकि उनका संचालन किया जा सके। युवाओं का सारा जोश और आक्रोश तो डॉक्टर ,इंजीनियर, CA आदि की तैयारी में चला जाता है। बाकी कसर नौकरी ,कैरियर और सेटल होने की जद्दोजहद में निकल जाता है।
आज का युवा वर्ग अपने दिमाग और रचनात्मकता के बजाय सोशल मीडिया की भेंड़चाल वाली राजनीति पर भरोसा करती है। जहां सच्चाई कम और झूठ ज्यादा है। देश की शासन व्यवस्था से शिकायत तो सभी को है परंतु देश की व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी कोई लेना नहीं चाहता। "कोउ नृप होहिं हमें का हानि" वाला माहौल चारों तरफ बन गया है। समाज में नेताओं की छवि इतनी बिगड़ गई है कि पढ़-लिखकर राजनीति में कैरियर बनाना शर्म की बात हो गई है।
आरती प्रियदर्शिनी , गोरखपुर
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